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नीमच. अफीम किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष भोपाल सिंह चौहान एवं प्रवक्ता शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने जारी एक प्रेस नोट में आज बताया कि आने वाली नयी अफीम नीति शीघ्र घोषित करने एवं उसमें  अपनी मांगों को समाहित कराने के लिए भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति मध्य प्रदेश, राजस्थान उत्तर प्रदेश प ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वित्त राज्य मंत्री, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं नारकोटिक्स कमिश्नर के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टरश्री चंद्र सिंह धारवे को सोंपा। ज्ञापन  में लिखा गया है कि नई अफीम नीति को सर्व समावेशी बनाते हुए उसमें निम्नलिखित मांगों को पूरा किया जाए जिसमें अफीम का मूल्य₹ एक लाख प्रति किलोग्राम किया जाए। 1990 से काटे गए सभी अफीम पट्टे लूणी घिरनी  के दिए जाएं। जिससे अफीम की खेती का इंतजार करें सभी किसानों को अफीम की खेती करने का अवसर मिले। मॉर्फिन यूनिट पर निर्भर किसान  नहीं रह सकता क्योंकि मॉर्फिन अफीम की प्रकृति पर निर्भर है। मारफीन 3.0 किलो प्रति किलोग्राम हेक्टर के आधार पर अफीम के लाइसेंस दिए जाएं। अफीम के लाइसेंस के नामांतरण में पारिवारिक मनमुटाव और झगड़े को रोकने के लिए राजस्व रिकॉर्ड  के अनुरूप नामांतरण सभी किसान भाइयों के नाम से खोला जाए ।
धारा 8/29 को हटाया जाए। डोडा चुरा को भी एनडीपीएस एक्ट से बाहर किया जाए क्योंकि डोडा चुराया एक प्रकार का पोस्ता का भूसा है। सीपीएस पद्धति को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए और अफीम की प्रोसेसिंग चाहे वह डोडे की हो या लूणी चिरनी से प्राप्त अफीम की हो इसकी प्रोसेसिंग प्राइवेट हाथों में नहीं दी जाए। डोडा चूरा की खरीदी सरकार द्वारा पुनः की जाए और उसका मूल्य ₹2000 प्रति किलो निश्चित किया जाए।  ज्ञापन  का वाचन समिति के संयोजक मांगीलाल मेघवाल  द्वारा किया गया। इस अवसर पर राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न गांव के किसान  मदन सिंह, गोपालसिंह चुंडावत ,कन्हैया लाल, दिलीप सिंह, निर्भय राम आंजना, सूरजमल पाटीदार, बंटी लाल शर्मा, मोहनलाल बंजारा, गुणवंत लाल राठौर,संतोष अहीर, मन्नालाल नागदा इत्यादि सहित कई अफीम उत्पादक किसान उपस्थित थे।