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नीमच ।भारतीय फ़िल्म संगीत जगत के मद मस्त हरफनमौला गायक किशोर कुमार के जन्मदिन के मौके पर  शहर के गीत संगीत को समर्पित 'सुर संगम म्यूजिकल ग्रुप "नीमच ने एक शाम किशोर दा के रूप मे ग्रुप सदस्यों द्वारा प्रस्तुत गीतों से याद किया l जिसमें किशोर कुमार के गाये  सदाबहार सुपरहिट गीत उनको समर्पित कर कार्यक्रम का आयोजन 5अगस्त 26 बुधवार शाम को किया गया । इस कार्यक्रम  में ग्रुप के सदस्यों ने गीतों के माध्यम से फिल्म  जगत के लीजेंड गायक, संगीतकार, गीतकार, अभिनेता के आधुनिक चुलबुले गीतों को  गाकर अपनी भावपूर्ण आदरंजलि दी । ग्रुप संयोजक  महेश शर्मा,अन्य सहयोगी जीवन कौशिक,  वीरेद्र दुबे,अनिल जैन,सतीश पाटीदार, लोकेश सैनी ने मां सरस्वती को नमन कर किशोर दा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया l ग्रुप सदस्यों ने किशोर दा के चुलबुले मनोरंजक गीत सहित सदाबहार  गीत की  प्रस्तुतियां दी गयी । कार्यक्रम मे प्रारम्भ मे महेश शर्मा तथा वीरेन्द्र दुबे द्वारा महान गायक किशोर कुमार के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डाला उनके जन्म स्थान खंडवा मध्य प्रदेश के अंतर्गत जन्म स्थान के बारे में भी जानकारी दीं l इसके पश्चात उनके गाए गई  सदाबहार गीतों पर स्वर लहरिया बिखेरी।  जिसमे सर्वप्रथम किशोर दास के चित्र पर माल्यार्पण किया गया ल इसके पश्चात प्रथम गीत प्रस्तुति  महेश जी शर्मा ने - मैं शायर बदनाम...
व मेरे मेहबूब कयामत होगी..वीरेंद्र दुबे - दिवाना लेके आया .. और,- रुक जाना नही तू कहीं हार के..सतीष पाटीदार ने - दिल क्या करे जब किसी से ... -सारा ज‌माना हंसीनो का दीवाना.. डॉ.जीवन कौशिक ने -गाडी बुला रही है सिटी बजा रही ..-रोते हूए आते सब, हंसता हूआ जो जाएगा..
अनिल जैन- मेरे दिल में आज क्या है तू कहे...तथा 
ओ मेरी ओ मेरी शर्मिली...राजकुमार लालवानी  - मेरे दिल ने तड़प कर जब नाम तेरा..,पल पल दिल के पास तुम रहती हो.. प्रणीत जैन- रुक जाना नहीं तू कहीं हार.. तथा
लेना होगा जन्म हमें कई कई.... लोकश सैनी-  चाहिये थोड़ा प्यार थोड़ा प्यार..., छोडो सनम काहे का गम..
जैसी एक से बढ़कर एक किशोर कुमार के ही रोचक मनोरंजक अंदाज  मे सदाबहार  गीतों की प्रस्तुतियां दी 
गई l इस दौरान ग्रुप संयोजक महेश जी शर्मा ने बताया 
की  किशोर कुमार के खंडवा, मध्य प्रदेश के निवासी होकर फ़िल्मी गीत संगीत के कई हुनर मे माहिर थेl जिनमें गायक , संगीतकार,डायरेक्टर अभिनेता जैसे कई गुण विद्यमान थे l सभी उपस्थित सदस्यों ने उनके जन्म दिवस के अवसर पर एक सामूहिक गीत - चलते चलते मेरे ये गीत. याद रखना कभी अलविदा ना कहना.... गाकर उनकी स्मृतियों को ताजा किया। अंत में सभी का आभार  सतीश पाटीदार ने व्यक्त किया l