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भोपाल। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बच्चों की पहली पाठशाला उसका घर होती है। माता-पिता उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं, लेकिन वास्तव में शिक्षक ही बच्चों को ज्ञान और संस्कारों से परिपूर्ण करते हैं। राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को आत्मीय भाव से पढ़ाएं। उनकी बुद्धि, क्षमता और अपेक्षाओं को समझते हुए अपनापन और सहनशीलता का व्यवहार करें। कठिनाईयों और जिज्ञासाओं को धैर्य के साथ सुनें। प्रेमपूर्वक व्यवहार करते हुए समाधान करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि बच्चे, विकसित भारत के कर्णधार हैं। शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्पकार हैं। इसलिए शिक्षक पहले स्वयं ज्ञान और नैतिक गुणों का आदर्श व्यक्ति बनें। बच्चों में ईमानदारी, सहनशीलता, जुझारूपन आदि गुणों का विकास कर, उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करें।
राज्यपाल श्री पटेल शनिवार को शिक्षक दिवस पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में हुए राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 और गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्तकर्ता शिक्षकों को सम्मानित कर सभी को शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। मां सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। राज्यपाल श्री पटेल का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधा भेंट कर स्वागत किया। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार- 2026 और गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत शिक्षकों के सम्मान का यह आयोजन, उन सभी शिक्षकों को नमन करने का प्रसंग है, जो ज्ञान और संस्कार से राष्ट्र का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता तो केवल बच्चे को जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक बच्चे के व्यक्तित्व को दिशा देकर आदर्श नागरिक बनाने का महान कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में देश ने नई सोच और नए कौशल के द्वारा शिक्षा को नये भारत की शक्ति बनाने का संकल्प, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षक, भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने का संकल्प ग्रहण करें।
शिक्षा को निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन की जरूरत
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आज की दुनिया में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती, उसे बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों के अनुरुप निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन करते रहना होगा। समय की जरूरत है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर, हमारी शिक्षा को नई पहचान और शक्ति प्रदान करें। कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारें हटाते हुए, विद्यार्थियों को उनकी रुचि से विषय चुन कर पढ़ने का भरपूर अवसर दिया जाए। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि आपको अब पाठ पढ़ाने से आगे बढ़कर, विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान कर, उन्हें प्रेरित करने और सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक के रूप में आगे आना होगा।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 में आज प्रदेश के 33 शिक्षकों का सम्मान हुआ है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं। यह आयोजन हमारे शिक्षकों को नमन करने का अवसर है, जो ज्ञान और संस्कार देकर देश का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शिक्षा को नए भारत की शक्ति बनाने का संकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। उन्होंने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे भारत को महाशक्ति बनाने का संकल्प लें। आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। उसे वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप अपग्रेड और इनोवेट करने की आवश्यकता है। बच्चों को उनकी रुचि के विषय चुनने का अवसर दिया जाए। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को खोजें और उसे आगे बढ़ने में सहयोग करें। बच्चों को संस्कारित करने में माता-पिता की जिम्मेदारी अहम है। तभी हमें देश के अच्छे नागरिक मिलेंगे। माता-पिता, बड़े भाई-बहन बच्चों से पूछें कि आज स्कूल में क्या पढ़ाया? हमारे लिए सभी शिक्षक सम्मानीय हैं। शिक्षक अपने परिवार के बच्चों की तरह उन्हें पढ़ाएं। बड़े होकर विद्यार्थी अपने शिक्षक को कभी नहीं भूलते हैं। आज सिखाए हुए बच्चे विकसित भारत @2047 के संकल्प में योगदान देंगे। बच्चों को सहनशील बनाएं। कई बच्चे मानसिक परेशानी में गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे बच्चों को प्यार से समझाएं। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो अपने माता-पिता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी न भूलें।
अध्यक्षीय संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर हैं। गुरुजन नि:संदेह विशेष भी हैं और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं का विशेषण भी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में देश का मान निरंतर बढ़ रहा है। इसके पीछे गुरु की महिमा है, क्योंकि जहां गुरूर खत्म होता है, और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुजन एक दीपक की तरह स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों को शिक्षित कर उनका पूरा जीवन-चरित्र आलोकित करते हैं। इस दुनिया में माता-पिता के बाद वो शिक्षक ही हैं, जो यह कामना करते हैं कि आप वह बनें, जो आप वास्तव में बनना चाहते हैं। आपको वह सब मिले, जो आप पाना चाहते हैं। इसीलिए गुरुजन सदैव वंदनीय हैं, पूजनीय हैं। इनका सदैव आदर-सम्मान और सत्कार करना हम सबका कर्तव्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षकों के इस सम्मान समारोह में घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी की परीक्षा देनी है और जिन्हें ऐसी ज़रूरत है, उन्हें ऑफलाइन टीईटी परीक्षा दिलाने के प्रयास और प्रबंध किए जाएंगे।