📰 पूरी खबर:
(लक्ष्मी प्रेमाणि )
सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल जी की भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा चालीहा साहिब पर्व इन दिनों सिंधी समाज में बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष चालीहा साहिब का आयोजन 16 जुलाई से 25 अगस्त तक चल रहा है। इन 40 दिनों में समाजजन उपवास, अखंड ज्योत, भजन-कीर्तन, झूलेलाल जी की पूजा-अर्चना तथा जल स्रोतों की पूजा जैसे धार्मिक आयोजन करते हैं।
चालीहा साहिब केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सिंधी समाज की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान झूलेलाल जी ने अत्याचार और संकट के समय समाज को सत्य, धर्म और एकता का मार्ग दिखाया। इसलिए इन दिनों श्रद्धालु संयम और सात्त्विक जीवन का पालन करते हुए भगवान झूलेलाल का स्मरण करते हैं।
चालीहा के दौरान अखंड ज्योत प्रज्वलित करने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। ज्योत को सत्य, ज्ञान और निरंतर आस्था का प्रतीक माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे चालीहे के दौरान व्रत रखते हैं और प्रतिदिन भगवान झूलेलाल जी की आराधना करते हैं।
सिंधी समाज में जल का विशेष महत्व है। भगवान झूलेलाल को जल से जुड़ी आस्था के रूप में पूजा जाता है। इसलिए चालीहा के समापन अवसर पर जल स्रोतों की पूजा, दीपदान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह परंपरा हमें जल के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण का संदेश भी देती है।
इन 40 दिनों में मंदिरों और झूलेलाल धामों में बहराना साहब का आयोजन किया जाता है जिसमें भगवान झूलेलाल जी केभजन, आरती, सत्संग और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ समाज की नई पीढ़ी को सिंधी भाषा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। परिवारों में बच्चे और युवा भी इन आयोजनों में भाग लेते हैं, जिससे परंपराएं अगली पीढ़ी तक पहुंचती हैं।
25 अगस्त को चालीहा साहिब के समापन अवसर पर विशेष सामूहिक रूप संपूर्ण समाज एकत्रित होकर बहराना सजाकरपूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और सामूहिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान झूलेलाल जी से परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करेंगे।
भगवान झूलेलाल जी का संदेश —सत्य के मार्ग पर चलें, एकता बनाए रखें, संकट की समय धैर्यरखो! निर्धनों की सेवा प्रकृति और जल का सम्मान करें ! तथा अपनी संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं। यही भगवान झूलेलाल जी के प्रति सच्ची श्रद्धा और सिंधी समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का संकल्प है।