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 नीमच ।श्रमणसंघीय जैन दिवाकरीय, मेवाड़ भूषण परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रतापमलजी म. सा. के सुशिष्य जैन मार्तंड, दक्षिण भूषण, जिनशासन प्रभावक परम पूज्य उपाध्याय प्रवर गुरुदेव *डॉ. श्री गौतममुनिजी म. सा.* 'प्रथम' के सानिध्य में प्रवचन में उपस्थित जनसमूह के समक्ष  दिवाकर भवन नीमच पर वर्षी तप आराधको बहुमान किया गया। इसमें मेवाड़ रत्न, आगमज्ञाता, सेवाभावी श्री वैभवमुनिजी म. सा. के गत 17 वर्षों से निरंतर वर्षीतप की तपस्या चल रही है। उनकी इस कठिन साधना को शत् शत् वंदन नमन किया गया। इसके बाद श्रीसंघ द्वारा शाल माला व अभिनंदन पत्र द्वारा श्री संघ के ग्यारह वर्षीतप आराधको का बहुमान किया गया। इसमें उपवास से वर्षी तप की आराधना करने वाले श्री पंकजकुमारजी - ममता जी भण्डारी सजोड़े, सुश्री प्रियलजी पोरवाल, अमिताजी नाहर, सविताजी बाबेल, सुषमाजी पामेचा, कृष्णाजी नाबेड़ा व एकासन से वर्षी तप की आराधना करने वाले श्री सुनिलकुमारजी - रेणुजी सुराना सजोड़े व प्रीतिजी सुराना, किरणजी चौहान का बहूमान श्रीसंघ के पदाधिकारियों व वरिषठजनो व महिला पदाधिकारियों व वरिष्ठ, तपस्वी महिलाओं द्वारा सभी का बहूमान किया गया। सभी तपस्वियों की खुब खुब अनुमोदना उपरोक्त जानकारी श्री वर्ध्दमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमच के अध्यक्ष मनोहरलाल (शम्भू) बम्ब ने दी।