📰 पूरी खबर:
जीरन .शासकीय महाविद्यालय जीरन में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्राचार्य डा0 हेमकांत तुगनावत की अध्यक्षता एवं मुख्य वक्ता विनोद कुमार पुनी (प्रांतीय कोषाध्यक्ष , मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ) एवं प्रतुपाल सिंह पंवार के आतिथ्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया । अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं महर्षि सांदीपनी के चित्र पर माल्यार्पण कर पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए
प्राचार्य डा0 तुगनावत द्वारा भगवान श्री कृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया । भगवान श्रीकृष्ण , बलराम जी शिक्षा- दीक्षा के लिए उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में आए । महर्षि सांदीपनि ने 16 दिन में भगवान श्री कृष्ण को 16 कलाओं से परिपूर्ण कर दिया था ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विनोद कुमार पुनी ने *महर्षि वेदव्यास के बारे में कहा कि लगभग 3000 वर्ष पूर्व द्वापर युग में जन्मे महर्षि वेदव्यास ने 18 पुराण 16 उपपुराण, महाभारत , श्रीमद् भागवत गीता एवं प्राचीन एक वेद से चार वेदों सामवेद , यजुर्वेद , ऋग्वेद एवं अथर्ववेद में वर्गीकरण किया ।*
*भारतीय संस्कृति एवं गुरु शिष्य परंपरा को उल्लेखित करते हुए धौम्म ऋषि एवं उनके शिष्य आरुणि , आचार्य चाणक्य एवं उनके शिष्य परम प्रतापी राजा चंद्रगुप्त मौर्य , रामकृष्ण परमहंस एवं स्वामी विवेकानंद , समर्थ गुरु रामदास एवं उनके शिष्य छत्रपति शिवाजी महाराज तथा संत रविदास एवं उनकी शिष्य भक्त शिरोमणि मीराबाई आदि के जीवन की घटनाओं के बारे में बताया। इस संसार में केवल सद्गुरु ही हैं जो बिना स्वार्थ के अपने शिष्य का कल्याण ,चतुर्दिक उन्नति एवं ख्याति चाहते हैं । सबके जीवन में सद्गुरु का सानिध्य मिलना अति आवश्यक है।*
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्रोफेसर एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ0शिखा सोनी द्वारा किया गया आभार महाविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ0 दुष्यंत भदोरिया द्वारा व्यक्त किया गया ।