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भोपाल । दूसरे राज्यों से सस्ते दामों पर पुरानी गाडिय़ां खरीदकर मध्य प्रदेश में चलाने का चलन परिवहन विभाग के लिए निगरानी की चुनौती बन गया है। वाहन दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके री-रजिस्ट्रेशन और टैक्स जमा होने का रिकॉर्ड अधूरा है। इससे न केवल सरकारी राजस्व प्रभावित हो रहा है, बल्कि वाहनों की वास्तविक पहचान और उनके दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिवहन विभाग ने जुलाई 2024 में दूसरे राज्यों से लाए गए वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन को लेकर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। नियमों के पालन में लापरवाही पर जुर्माना और वाहन जब्त करने का प्रावधान बताया गया था। इसके बावजूद उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि दूसरे राज्यों से खरीदे गए सभी वाहनों का पंजीयन और टैक्स संबंधी रिकॉर्ड पूरा नहीं हो पाया है।
भोपाल में 2175 वाहनों का हिसाब बाकी
अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच भोपाल में दूसरे राज्यों से 3840 पुरानी गाडिय़ां खरीदी गईं। इनमें से केवल 1665 वाहनों का री-रजिस्ट्रेशन कराया गया या टैक्स जमा हुआ। इस हिसाब से 2175 वाहनों के मामले में संबंधित प्रक्रिया पूरी होने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के सभी जिलों में इसी अवधि के दौरान दूसरे राज्यों से 25,090 पुरानी गाडिय़ां लाई गईं। इनमें से 9113 वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन या टैक्स जमा होने की जानकारी है। यानी 15,977 वाहनों के मामले में प्रक्रिया पूरी होने का रिकॉर्ड नहीं मिला है। हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी वाहन अवैध रूप से चल रहे हैं, लेकिन विभाग के सामने रिकॉर्ड का सत्यापन करने की चुनौती जरूर है।
फर्जी एनओसी से पंजीयन का मामला भी सामने आया
दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों में दस्तावेजों की गड़बड़ी ने परिवहन विभाग की चिंता बढ़ाई है। बीते महीनों में 2000 से अधिक ट्रांसफर एनओसी प्रकरणों की जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। इनमें लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड से एनओसी के आधार पर मध्य प्रदेश में पंजीयन के लिए आए करीब 700 वाहनों के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली। जांच के दौरान संबंधित वाहन निर्माताओं से मॉडल और चेसिस नंबर का सत्यापन कराया गया। कुछ मामलों में कंपनियों ने संबंधित वाहनों के निर्माण से ही इनकार कर दिया। इसके बाद परिवहन विभाग ने 700 से अधिक वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए थे। इन मामलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। हालांकि, सभी वाहनों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
पोर्टल पर सत्यापन के बाद ही पंजीयन
अनियमितताओं को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दूसरे राज्यों की एनओसी के आधार पर पंजीयन करने से पहले वाहन के मेक, मॉडल और चेसिस नंबर का मिलान केंद्र सरकार के होमोलोगेशन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से किया जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन के दस्तावेज और निर्माता कंपनी के रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हों। इससे फर्जी एनओसी, संदिग्ध चेसिस नंबर और ऑनलाइन बैकलॉग एंट्री के दुरुपयोग जैसे मामलों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
टैक्स बचाने के लिए दूसरे राज्यों का रुख
दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से पुरानी गाडिय़ां अपेक्षाकृत कम कीमत पर खरीदकर मध्य प्रदेश में लाने के मामले सामने आते रहे हैं। दूसरे राज्यों में पुराने वाहनों पर लागू प्रतिबंधों और नियमों के कारण भी कुछ वाहन दूसरे बाजारों में बेचे जाते हैं। ऐसे वाहनों को मध्य प्रदेश में लाने पर लागू पंजीयन और कर संबंधी नियमों का पालन जरूरी है। परिवहन विभाग के अनुसार, दूसरे राज्य से वाहन लाने पर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है। री-रजिस्ट्रेशन के समय वाहन का नंबर बदलना हर मामले में जरूरी नहीं होता; यह संबंधित नियमों और प्रक्रिया पर निर्भर करता है। वाहन की श्रेणी, उम्र, मूल्य और लागू कर नियमों के अनुसार देय राशि तय होती है। अब चुनौती केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों पर कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से आए वाहनों का सही रिकॉर्ड तैयार करने की भी है। विभाग के लिए जरूरी होगा कि लंबित मामलों का सत्यापन कर यह स्पष्ट किया जाए कि कितने वाहनों का पंजीयन बाकी है, कितनों का टैक्स जमा नहीं हुआ और कितने मामलों में दस्तावेजों की वास्तविक गड़बड़ी है। इससे राजस्व की स्थिति स्पष्ट होने के साथ संदिग्ध वाहनों की पहचान और कार्रवाई को भी दिशा मिल सकेगी।