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भोपाल । नगर निगम की सडक़ मरम्मत व्यवस्था में अजीब स्थिति सामने आई है। शहर में बारिश और सीवेज की खुदाई से बड़ी संख्या में सडक़ें खराब हैं, लेकिन निगम के पास अब तक यह स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है कि किस वार्ड में कितनी सडक़ खराब है और कितनी लंबाई में मरम्मत की जरूरत है। इसके बावजूद सडक़ मेंटेनेंस के लिए करीब 15 करोड़ रुपए के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 2421 किमी सडक़ नेटवर्क है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 968 किमी सडक़ें खराब मानी जा रही हैं। वहीं करीब 398 किमी सडक़ें सीवेज की खुदाई से प्रभावित हैं। कई जगह बारिश से पहले खुदाई के बाद रेस्टोरेशन नहीं होने के कारण सडक़ें और ज्यादा खराब हो गईं।
नगर निगम ने सडक़ मेंटेनेंस के लिए तीन हिस्सों में 5-5 करोड़ रुपए के टेंडर किए हैं। इसमें डामरीकरण, पैच रिपेयर और गड्ढे भरने के साथ सीसी रोड व अन्य मेंटेनेंस कार्य शामिल हैं। लेकिन टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के समय निगम के पास खराब सडक़ों की वार्डवार सूची और उनकी वास्तविक लंबाई का ताजा सर्वे नहीं था। अब अधिकारियों से वार्डवार खराब सडक़ों की सूची और लंबाई मांगी गई है। यानी मरम्मत का बजट और टेंडर पहले तय हो गए, जबकि किन सडक़ों पर कितना काम होना है, इसका हिसाब बाद में तैयार किया जा रहा है।
बारिश का हवाला देकर सर्वे टला
अधिकारियों का तर्क है कि बारिश के दौरान सडक़ों की स्थिति लगातार बदलती रहती है। जलभराव और बारिश के कारण नए गड्ढे बनते हैं और पुरानी क्षति भी बढ़ती है। इसलिए बारिश थमने के बाद वास्तविक स्थिति का सर्वे कराया जाएगा। फिलहाल जोन स्तर पर कोपरा, जीएसबी और सीएंडडी वेस्ट डालकर गड्ढों की अस्थायी मरम्मत की जा रही है। पक्का डामरीकरण, पैचवर्क और सीसी रोड का काम वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद किया जाएगा।
398 किमी सडक़ें खुदाई के बाद बदहाल
सीवेज प्रोजेक्ट की खुदाई ने भी सडक़ व्यवस्था पर बड़ा असर डाला है। करीब 398 किमी सडक़ें खुदाई से प्रभावित बताई गई हैं। कई स्थानों पर बारिश से पहले रेस्टोरेशन नहीं हो सका। मिट्टी और मलबा डालकर छोड़े गए हिस्से बारिश में धंस गए, जिससे सडक़ पर गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ हिस्से बन गए। निगम का कहना है कि सीवेज की खुदाई से खराब हुई सडक़ों का पक्का संधारण संबंधित सीवेज ठेकेदारों की जिम्मेदारी है। यह मामला दिशा की बैठक में भी सामने आ चुका है।
पीडब्ल्यूडी ने डेडलाइन तय की, निगम अभी सूची बना रहा
दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी ने अपनी करीब 174 किमी सडक़ों के मेंटेनेंस की डेडलाइन 30 सितंबर तय कर दी है। नगर निगम क्षेत्र में जहां बारिश के बाद सडक़ें तेजी से खराब हुई हैं, वहीं निगम अभी यह सूची तैयार कर रहा है कि वास्तव में कितनी सडक़ें और कितनी लंबाई मरम्मत के दायरे में आएगी। नगर निगम के अधीक्षण यंत्री आरआर जारोलिया के अनुसार, मेंटेनेंस के लिए 15 करोड़ रुपए का टेंडर अंतिम चरण में है। ईई से सडक़ों की सूची मांगी गई है और बारिश रुकने के बाद री-कार्पेटिंग, पैचवर्क तथा सीसी रोड का काम शुरू किया जाएगा। तब तक रूटीन मरम्मत जारी रहेगी।