📰 पूरी खबर:

 
नीमच.‘जब हम किसी लक्ष्य की और बढ़ते हैं तो हमारे विचारों में अनिश्चितता व एकाग्रता की कमी हमें लक्ष्य से दूर कर देती है । विचारों का अधिक प्रवाह हमारी एकाग्रता को भंग कर देता है, इसलिए जैसा हम सोचते हैं, बोलते हैं वही हमारे कर्म में आता है और हमारे भाग्य का निर्माण हो जाता है । ’’ उपरोक्त विचार तनाव मुक्ति विशेषज्ञा राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी श्रुति दीदी ने केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1 में आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट ट्रेनिंग के दौरान व्यक्त किये । आपने बताया कि हमेशा हर परिस्थिति के प्रति हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक रहना चाहिए इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी सुप्त आंतरिक शक्तियों  का विकास करें और यह कार्य आध्यत्मिक प्रयास अर्थात्‌ मेडिटेशन के द्वारा ही संभव है । मेडिटेशन से जो गहरी शांति और शक्ति मिलती है, इसी उर्जा से हमारी आंतरिक शक्तियाँ विकसित होती हैं ।
स्ट्रेस मैनेजमेंट ट्रेनिंग की सहयोगी बी.के.मेघना बहन ने गृहस्थ परिवार में तनाव का मुख्य कारण अपने कार्यस्थल का तनाव मन में रखकर घर तक ले जाना और इसी से हमारा व्यवहार बदल जाता है तथा परिवार में क्लेश का कारण बनता है । इसलिए अपने कार्यस्थल का तनाव वहीं समाप्त कर घर जाना बेहतर होगा । 
कार्यक्रम की शुरूआत में केन्द्रीय विधालय के प्राचार्य प्रियदर्शन गर्ग ने दोनों ब्रह्माकुमारी दीदीयों का गुलदस्ते भेंट कर स्वागत किया तथा विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक ने लखनलाल मीणा ने स्वागत भाषण देकर कार्यक्रम की भूमिका स्पष्ट की, अंत में प्राचार्य महोदय ने सभी का आभार प्रदर्शन किया ।