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      जिले में 3 से 4 गोवंश अथवा भैंसवंशीय पशुधन रखने वाले 10,084 पशुपालकों को चिन्हित किया गया है। विभाग के प्रशिक्षित सर्वेयर एवं मैत्रीकर्ता निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार प्रत्येक पशुपालक के घर पहुंचकर पशु नस्ल सुधार, पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन तथा वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही शासन के 'गोरस एप' एवं पशुपालन संबंधी उपयोगी डिजिटल सामग्री भी पशुपालकों तक पहुंचाई जा रही है।अभियान की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय जिला नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश शर्मा ने जिले के विभिन्न विकासखंडों का भ्रमण कर गृहभेंट गतिविधियों का सत्यापन किया तथा अभियान की प्रगति का जायजा लिया।पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार 20 जुलाई 2026 तक 8,160 पशुपालकों के यहां गृहभेंट कर निर्धारित गतिविधियां पूर्ण की जा चुकी हैं। अभियान की सतत निगरानी जिला एवं विकासखंड स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी की जा रही है।