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भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने और उनके सही इस्तेमाल की जानकारी देने वाले फार्मासिस्टों की भारी कमी बनी हुई है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित स्वीकृत पदों के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में फार्मासिस्ट के कुल 2623 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 1132 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 43.2 प्रतिशत पदों पर फार्मासिस्ट पदस्थ नहीं हैं।
सबसे ज्यादा कमी फार्मासिस्ट ग्रेड-1 के पदों में है। इस श्रेणी में 57 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सिर्फ 24 पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 33 पद खाली हैं। इस तरह ग्रेड-1 के करीब 58 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वहीं फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के 2566 स्वीकृत पदों में 1467 कर्मचारी कार्यरत हैं और 1099 पद खाली हैं। ग्रेड-2 में भी करीब 43 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
भर्ती के बाद भी नहीं भरे पद
फार्मासिस्टों की कमी दूर करने के लिए पिछले वर्षों में भर्ती प्रक्रिया भी हुई, लेकिन इसके बावजूद रिक्त पदों की संख्या बड़ी बनी हुई है। वर्ष 2024 की कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-5 भर्ती में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के 29 पद शामिल थे। इसके बाद 2025 की पैरामेडिकल भर्ती में इसी श्रेणी के 313 पद शामिल किए गए। वहीं फार्मासिस्ट ग्रेड-2 भर्ती परीक्षा 2023 में चयनित अभ्यर्थियों में से कुछ नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। चयनित अभ्यर्थी विमलेश कुमार के अनुसार अभ्यर्थियों ने अधिकारियों और शासन को कई बार अपनी मांग से अवगत कराया है, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रदेश में 334 संस्थानों में फार्मेसी की पढ़ाई
एक ओर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में फार्मासिस्टों के पद खाली हैं, दूसरी ओर प्रदेश में फार्मेसी की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों की संख्या भी बड़ी है। उपलब्ध शिक्षा संबंधी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब 334 फार्मेसी संस्थान हैं। इनमें 21 सरकारी और 190 निजी संस्थान बताए गए हैं। ऐसे में फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में खाली पदों के बीच बेहतर तालमेल का सवाल सामने आता है। हालांकि उपलब्ध 2623 पदों का आंकड़ा केवल लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित स्वीकृत पदों का है। इसमें एनएचएम, संविदा और अन्य संस्थानों के फार्मासिस्ट शामिल नहीं हैं।