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भोपाल । भोपाल में रहवासी और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच चल रहा विवाद अब शहर के भविष्य के विकास की दिशा तय कर सकता है। 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामले की सुनवाई प्रस्तावित है। सरकार इस दौरान सिर्फ मौजूदा कार्रवाई का पक्ष ही नहीं रखेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि तेजी से बढ़ते भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान क्यों जरूरी है। यदि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है तो सरकार नए मास्टर प्लान का प्रारूप जल्द जारी करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही यह तय होगा कि शहर में आने वाले वर्षों में किन इलाकों में आवासीय गतिविधियां होंगी, कहां कारोबार की अनुमति होगी और किन क्षेत्रों को उद्योग-व्यापार के लिए विकसित किया जाएगा।
प्रस्तावित मास्टर प्लान के खाके में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सडक़ की चौड़ाई को अहम आधार बनाया गया है। सूत्रों के अनुसार जिन क्षेत्रों में मुख्य सडक़ 18 मीटर से कम चौड़ी होगी, वहां व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देने का प्रावधान रखा जा सकता है। इसका सीधा असर उन इलाकों पर पड़ेगा जहां रहवासी कॉलोनियों के भीतर समय के साथ दुकानें, बड़े शोरूम और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो गए हैं। पार्किंग सहित निर्धारित शर्तों को पूरा करना भी जरूरी होगा। यानी नए मास्टर प्लान में सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि जमीन का उपयोग किस उद्देश्य के लिए निर्धारित है, बल्कि सडक़ की क्षमता और यातायात व्यवस्था भी व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति का आधार बन सकती है।
मेट्रो के आसपास बढ़ेगी ऊंचाई
भोपाल के नए विकास मॉडल में मेट्रो कॉरिडोर को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्रस्तावित प्रावधानों में मेट्रो कॉरिडोर के आसपास 15 मंजिल तक बहुमंजिला भवनों के निर्माण की अनुमति का प्रावधान किया जा सकता है। इसका उद्देश्य शहर के उन हिस्सों में अधिक घनत्व वाला विकास करना हो सकता है जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे आने वाले समय में मेट्रो के आसपास आवासीय और व्यावसायिक विकास का स्वरूप बदल सकता है।
शहर के चारों कोनों में बनेंगे नए कारोबार के ठिकाने
नए मास्टर प्लान में सबसे बड़ा बदलाव शहर के मौजूदा बेतरतीब व्यावसायिक विस्तार को नियंत्रित करने से जुड़ा हो सकता है। इसके लिए शहर के चारों कोनों में उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यकतानुसार क्षेत्र आरक्षित करने का प्रस्ताव है। इसका मकसद कारोबार को रहवासी इलाकों में फैलने से रोककर उसे निर्धारित क्षेत्रों में विकसित करना होगा। इससे बाजार, उद्योग और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र विकसित करने की योजना बन सकती है।
कृषि क्षेत्र में भी बदलेंगे जमीन उपयोग के विकल्प
मास्टर प्लान में कृषि क्षेत्र को लेकर भी बदलाव प्रस्तावित हैं। निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति के बाद कृषि क्षेत्र में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और गोदाम जैसी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है। इससे शहर के आसपास के बड़े कृषि क्षेत्रों में भविष्य के विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति जरूरी होगी।
21 साल से पुराने प्लान से आगे बढ़ेगा भोपाल
भोपाल का मौजूदा मास्टर प्लान 1995 में लागू हुआ था। उस समय शहर की आबादी करीब 10 से 15 लाख के बीच थी। इसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो गई। इसके बाद वर्ष 2010 में मास्टर प्लान-2021 का प्रारूप तैयार किया गया था। इस प्रारूप में 813 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 196 गांव शामिल किए गए थे, लेकिन कई आपत्तियों के बाद यह आगे नहीं बढ़ सका। नतीजा यह हुआ कि शहर के विस्तार के साथ विकास का बड़ा हिस्सा मास्टर प्लान के बजाय अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से होता गया। रहवासी इलाकों में बाजार और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हुए और कई जगह यातायात तथा पार्किंग की समस्या बढ़ती गई।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ा विवाद
रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया। व्यापारी इसके विरोध में सामने आए, जबकि रहवासियों का एक वर्ग कार्रवाई के समर्थन में खड़ा हुआ। स्थिति को देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकालने के लिए समिति बनाने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम पर आपत्ति जताई और इसे अवमानना की श्रेणी में मानने की बात कही। इसके बाद आदेश निरस्त करना पड़ा। अब 15 सितंबर की सुनवाई इसलिए अहम है क्योंकि सरकार कोर्ट के सामने पुराने विवाद के साथ भोपाल के भविष्य की विकास जरूरतों को भी रखेगी।
कोर्ट से राहत मिली तो तेजी से आगे बढ़ेगा प्लान
सरकार का तर्क होगा कि पिछले तीन दशकों में भोपाल का क्षेत्रफल, आबादी और विकास का स्वरूप काफी बदल चुका है। शहर को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र घोषित किया जा चुका है और औद्योगिक विकास भी बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने मास्टर प्लान के आधार पर मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल है। सरकार अब नए मास्टर प्लान में रहवासियों और कारोबारियों दोनों के हितों को ध्यान में रखने की बात कह रही है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को भी शामिल किया जाएगा। यदि 15 सितंबर की सुनवाई में सरकार को राहत मिलती है तो नए मास्टर प्लान का प्रारूप जल्द जारी किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां लेकर इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू होगी। यानी 15 सितंबर की सुनवाई सिर्फ मौजूदा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए ही अहम नहीं है। इसका असर यह तय करने पर भी पड़ सकता है कि अगले कई वर्षों में भोपाल का विस्तार किस दिशा में होगा और शहर में घर, बाजार, उद्योग और संस्थानों के लिए जगह कैसे तय की जाएगी।