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भोपाल राजधानी में अपराध के आंकड़ों में इस साल सबसे बड़ा बदलाव गंभीर अपराधों से ज्यादा माइनर अपराधों की संख्या में हुआ है। 30 अगस्त तक के आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में कुल अपराध 29 प्रतिशत बढ़े हैं, लेकिन इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह छोटी श्रेणी के अपराध हैं। माइनर अपराधों की संख्या एक साल में 3,332 से बढक़र 5,524 हो गई। यानी इनमें 2,192 मामलों और करीब 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं सामान्य अपराध भी बढ़े हैं। 2025 में 30 अगस्त तक 9,389 सामान्य अपराध दर्ज हुए थे, जो इस साल बढक़र 10,901 हो गए। यानी सामान्य अपराधों में 1,512 मामले और करीब 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। दोनों श्रेणियों को मिलाकर इस साल 16,425 अपराध दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 12,721 था।
आंकड़ों पर नजर डालें तो अपराध में कुल 3,704 मामलों की वृद्धि हुई है। इसमें अकेले माइनर अपराधों का हिस्सा 2,192 है। यानी कुल बढ़े मामलों का बड़ा हिस्सा छोटी श्रेणी के अपराधों से आया है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राजधानी में अपराध के आंकड़ों की तस्वीर केवल गंभीर अपराधों के बढऩे की कहानी नहीं रह जाती। पुलिस के अनुसार छोटी से छोटी शिकायत पर केस दर्ज करने की नीति के कारण भी आंकड़े बढ़ रहे हैं।
अब शिकायत दबती नहीं, एफआईआर होती है
अपराध के बढ़ते आंकड़ों पर पुलिस का तर्क है कि अब शिकायतों को दर्ज करने में पहले की तुलना में ज्यादा गंभीरता बरती जा रही है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के मुताबिक, छोटी से छोटी घटना पर भी केस दर्ज करने पर जोर दिया जा रहा है। हर शिकायत दर्ज कर कार्रवाई करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि पीडि़त को न्याय मिल सके। इसका सीधा असर दर्ज अपराधों की संख्या पर दिखाई दे रहा है। यानी बढ़े हुए आंकड़ों को पुलिस केवल अपराध में वृद्धि के रूप में नहीं, बल्कि रिपोर्टिंग और स्नढ्ढक्र दर्ज करने की प्रक्रिया में बदलाव के तौर पर भी देख रही है।
सामान्य अपराध भी लगातार ऊपर
हालांकि केवल एफआईआर बढऩे को ही अपराध में बढ़ोतरी की वजह मानना तस्वीर का पूरा हिस्सा नहीं है। सामान्य अपराधों में भी एक साल में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 9,389 से बढक़र यह आंकड़ा 10,901 तक पहुंच गया। इसलिए राजधानी में अपराध के ट्रेंड को दो हिस्सों में देखना होगा-एक तरफ छोटी घटनाओं की रिपोर्टिंग तेजी से बढ़ी है, दूसरी तरफ सामान्य अपराधों में भी वास्तविक मामलों की संख्या ऊपर गई है।
जोन-1 में सबसे ज्यादा केस
30 अगस्त तक दर्ज 16,425 मामलों में जोन-1 सबसे आगे रहा। यहां 4,169 अपराध दर्ज हुए। जोन-2 में 4,557, जोन-3 में 3,225 और जोन-4 में 3,954 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा महिला थाने में 396 और क्राइम ब्रांच में 119 मामले दर्ज हुए। अजाक थाने में 5 मामले दर्ज हुए।
अब चुनौती हर शिकायत का निपटारा
अपराध के आंकड़ों में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी पुलिस के लिए चुनौती है, लेकिन माइनर अपराधों में 66 प्रतिशत का उछाल एक अलग संकेत देता है। यदि पुलिस की ज्यादा स्नढ्ढक्र दर्ज करने की नीति से आंकड़े बढ़े हैं तो इसका अगला सवाल यह है कि इन मामलों में कार्रवाई और निस्तारण की स्थिति क्या है। राजधानी में अपराध नियंत्रण की तस्वीर इसलिए केवल दर्ज एफआईआर की संख्या से नहीं, बल्कि एफआईआर के बाद कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और मामलों के निपटारे से भी तय होगी। फिलहाल 30 अगस्त तक के आंकड़े इतना जरूर बताते हैं कि भोपाल में इस साल अपराध का सबसे तेज बढ़ता हिस्सा छोटी घटनाएं बनी हैं।