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नई दिल्ली। तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने भयावह तबाही मचाई है, जिससे हजारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हुआ है। इस आपदा में आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जाहिर किया है, क्योंकि उनके कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 80 लोगों का एक समूह बाढ़ की चपेट में आने के बाद लापता हुआ है। सद्गुरु ने स्थिति को बेहद गंभीर बताकर कहा कि नुकसान का सही आकलन करना अभी मुश्किल है।
सद्गुरु ने एक वीडियो जारी कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं ठप हैं, और रास्ते भी बाधित हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्र में संपर्क करना लगभग असंभव हुआ है। उन्होंने भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने का प्रयास किया है, ताकि राहत और बचाव कार्यों में सहायता की जा सके।
उन्होंने जानकारी दी कि उनके एस3 समूह में 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल थीं, जो विभिन्न देशों अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फ्रांस, नेपाल सहित अन्य से थीं। यह समूह बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा था, और ठीक 9:14 बजे भयावह आपदा आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया। कुल 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता हैं। सद्गुरु ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक बड़ा हिस्सा पानी और मलबे में बह गया है।
उन्होंने लोकल नेपाली गाइडों और उनके परिवारों की सुरक्षा पर भी चिंता जाहिर की है। जिनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने या ग्लेशियर से जुड़ी घटना के कारण आई अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) थी। पानी की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं। बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है।
सद्गुरु ने कहा कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दे दी गई है और प्रभावित परिवारों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दोहराया कि इस मुश्किल समय में हरसंभव तरीके से मदद करना उनकी प्राथमिकता है और सबसे ज़रूरी काम किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाना और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाना है।