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भोपाल । मध्यप्रदेश की राजनीति में चुनाव प्रचार का अंदाज तेजी से बदल रहा है। अब पारंपरिक सभाओं, पोस्टरों और नारों के साथ रील, मीम और सोशल मीडिया स्टोरी भी चुनावी रणनीति का बड़ा हथियार बनने जा रही हैं। 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को अपने साथ जोडऩे की तैयारी में जुटी हैं।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा की योजना प्रदेश के हर जिले में करीब 50 से 100 माइक्रो इंफ्लुएंसर जोडऩे की है। इनमें 10 हजार से एक लाख तक फॉलोअर्स वाले इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक क्रिएटर शामिल किए जा सकते हैं। पार्टी का फोकस सिर्फ राजनीतिक चेहरों तक सीमित नहीं रहेगा। फूड, ट्रैवल, कॉमेडी और एजुकेशन कंटेंट बनाने वाले स्थानीय क्रिएटर्स को भी नेटवर्क में शामिल करने की तैयारी है। इनके जरिए सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को स्थानीय भाषा और युवाओं की पसंद के मुताबिक प्रस्तुत करने की रणनीति है। यानी जिस मुद्दे को नेता मंच से भाषण में समझाते हैं, वही बात अब कोई स्थानीय क्रिएटर 30 सेकंड की रील में अपने अंदाज में लोगों तक पहुंचाएगा।
कांग्रेस ने डिजिटल योद्धा उतारने की तैयारी की
भाजपा की डिजिटल रणनीति का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस भी पीछे नहीं रहना चाहती। पार्टी ‘डिजिटल योद्धा’ नाम से अपना सोशल मीडिया नेटवर्क तैयार कर रही है। कांग्रेस का जोर खासतौर पर मीम क्रिएटर्स और रोस्ट कंटेंट पर रहने की बात सामने आई है। पार्टी का मानना है कि युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पारंपरिक भाषणों की तुलना में मीम और छोटी वीडियो ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं। इसके लिए भोपाल में सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की बड़ी वर्कशॉप आयोजित किए जाने की तैयारी भी बताई जा रही है।
2028 के लिए अभी से डिजिटल तैयारी
दरअसल, राजनीतिक दलों को अब सोशल मीडिया सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि सीधे मतदाता तक पहुंचने वाले चुनावी हथियार के रूप में दिखाई दे रहा है। खासकर युवा मतदाताओं के बीच इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक की पहुंच ने पार्टियों की रणनीति बदल दी है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि भाजपा समय के साथ खुद को अपग्रेड करने वाली पार्टी है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाना भी जरूरी है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए। वहीं कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सोशल मीडिया के जरिए झूठ फैलाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भी उसी भाषा में जवाब देने के लिए अपने डिजिटल योद्धाओं को तैयार कर रही है।
अब चुनावी लड़ाई का नया मोर्चा सोशल मीडिया
दोनों दलों की तैयारियों से साफ है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में डिजिटल प्रचार का दायरा पहले के मुकाबले कहीं बड़ा हो सकता है। राजनीतिक दलों की नजर अब सिर्फ बड़े सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले छोटे क्रिएटर्स पर है। यानी आने वाले चुनाव में किसी विधानसभा क्षेत्र का लोकप्रिय फूड ब्लॉगर, कॉमेडी क्रिएटर या स्थानीय यूट्यूबर भी अप्रत्यक्ष रूप से चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बन सकता है। नेताओं के साथ अब ‘कंटेंट क्रिएटर’ भी चुनावी जंग के नए चेहरे बनते दिखाई दे रहे हैं।