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Local News
सरकार अफसरों को बाजार का पाठ पढ़ाएगी,जिले के उत्पाद को ग्लोबल बाजार तक पहुंचाने की तैयारी, अब अफसर सीखेंगे ब्रांडिंग से एक्सपोर्ट तक
📅 20 Sep, 2026
📰 पूरी खबर:
- कलेक्टर से लेकर कृषि-अधिकारी तक करेंगे ऑनलाइन कोर्स; जीआई टैग, पैकेजिंग, निर्यात और बैंक ऋण की बारीकियां समझेंगे
- भोपाल । मध्य प्रदेश के जिलों की पहचान वाले उत्पादों को अब स्थानीय बाजार से निकालकर वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है। इसके लिए सरकार पहले उन अधिकारियों को तैयार करेगी, जिनके स्तर पर जिले में इन उत्पादों से जुड़ी योजनाएं और गतिविधियां संचालित होती हैं। मिशन कर्मयोगी के तहत कलेक्टर से लेकर कृषि, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग के अधिकारियों को एक जिला-एक उत्पाद की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग का फोकस केवल एक जिला-एक उत्पाद उत्पादों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा। अधिकारियों को यह समझाया जाएगा कि किसी स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाजार के अनुरूप कैसे तैयार किया जाए, उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग कैसे हो तथा निर्यात की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई जाए।
इस ऑनलाइन कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर के साथ उद्यानिकी, कृषि, मत्स्य सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। कोर्स पूरा करने के बाद अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य एक जिला-एक उत्पाद और एक्सपोर्ट प्रमोशन से जुड़े अधिकारियों की क्षमता बढ़ाना है। यानी किसी जिले के उत्पाद को बाजार दिलाने की प्रक्रिया में अब प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका सिर्फ योजना लागू करने तक नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें उत्पाद के बाजार और निर्यात की संभावनाओं की जानकारी भी दी जाएगी।
जीआई टैग से पैकेजिंग तक का पाठ
आइगोट पोर्टल पर एक जिला-एक उत्पाद बेसिक, एक जिला-एक उत्पाद 2.0 एडवांस्ड, जीआई बेसिक, एक्सपोर्ट बेसिक, एक्सपोर्ट-एक जिला-एक उत्पाद और जीआई केंद्रित कोर्स उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग में एक जिला-एक उत्पाद को सपोर्ट करने वाली पीएमएफएमई योजना और कृषि व बागवानी उत्पादों के लिए फार्म गेट से फैक्टरी गेट तक की प्रक्रिया भी पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
परीक्षा में भी परखी जाएगी समझ
ट्रेनिंग केवल वीडियो देखने तक सीमित नहीं होगी। अधिकारियों से कोर्स से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। इनमें निर्यात की सरल परिभाषा, किसी पारंपरिक उत्पाद या कारीगर की कहानी में बदलाव का कारण और वैश्विक बाजार में जीआई टैग, एक जिला-एक उत्पाद ब्रांडिंग और पैकेजिंग की अहमियत जैसे सवाल शामिल होंगे। सही विकल्प चुनकर अधिकारी अपनी समझ का आकलन करेंगे।
उत्पाद तैयार है तो पैसा कहां से आएगा, यह भी सीखेंगे
वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए केवल उत्पाद और खरीदार पर्याप्त नहीं हैं। वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रेनिंग में एक्सपोर्ट क्रेडिट, कोलेटरल सपोर्ट, बैंक ऋण, जोखिम कम करने के तरीके और ऑर्डर मिलने के बाद भुगतान की व्यवस्था जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ अधिकारियों को वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा और डिजिटल माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने के अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी।
स्थानीय उत्पाद की पूरी वैल्यू चेन समझने पर जोर
प्रशिक्षण का एक अहम हिस्सा मूल्यवर्धन को निर्यात की ताकत के रूप में समझना है। पाठ्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि दुनिया केवल उत्पाद नहीं, उसकी कहानी और पहचान भी खरीदती है। इसी कारण स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, जीआई टैग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग को वैश्विक बाजार से जोडऩे पर जोर दिया गया है। इस ट्रेनिंग के जरिए सरकार का फोकस साफ है—जिले में उत्पाद की पहचान कराने से आगे बढक़र उसे बाजार, ब्रांड और निर्यात से जोडऩा।
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