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मुंबई। महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की अब जमीनी स्तर पर जांच की जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने राज्य के 1 लाख 10 हजार 625 आंगनवाड़ी केंद्रों का क्रॉस वेरिफिकेशन करने का फैसला लिया है। इसके तहत 20 अक्टूबर से विशेष जांच अभियान शुरू होगा, जो 20 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस संबंध में हाल ही में शासनादेश जारी किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराई गई सुविधाएं वास्तव में मौजूद हैं या नहीं, वे सही स्थिति में हैं या नहीं और डिजिटल प्रणाली में उनकी जानकारी सही दर्ज की गई है या नहीं। इससे कागजों पर दर्ज आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर का पता लगाने में मदद मिलेगी।
- दूसरे बीट के आंगनवाड़ी केंद्रों की जांच करेंगी पर्यवेक्षक
जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए क्रॉस वेरिफिकेशन की व्यवस्था की गई है। इसके तहत एक बीट की मुख्य सेविका या पर्यवेक्षक को दूसरे बीट के आंगनवाड़ी केंद्रों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मुख्य सेविकाओं और पर्यवेक्षकों को अपने हिस्से की जांच 5 नवंबर 2026 तक पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पास जमा करनी होगी। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की जांच की जाएगी और जिलावार आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
- वरिष्ठ अधिकारी भी करेंगे औचक निरीक्षण
जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रत्यक्ष निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और विभागीय उपायुक्त अपने स्तर पर कम से कम एक आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान रिपोर्ट में दर्ज जानकारी की वास्तविक स्थिति से तुलना की जाएगी। यदि किसी केंद्र में सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उपकरण खराब हैं या डिजिटल रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, तो ऐसी कमियों की पहचान की जा सकेगी।
- महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों का विवरण इस प्रकार है:
मंजूर आंगनवाड़ी केंद्र: लगभग 97,775
मंजूर मिनी आंगनवाड़ी केंद्र: लगभग 13,011
कुल बाल विकास परियोजनाएं: 553
ग्रामीण परियोजनाएं: 449
शहरी परियोजनाएं: 104
विभाग के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, जिला वार्षिक योजनाओं, 15वें वित्त आयोग तथा स्थानीय निकायों के माध्यम से आंगनवाड़ियों को अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जांच के दौरान इन सुविधाओं की उपलब्धता और वर्तमान स्थिति का सत्यापन किया जाएगा।
- साल में दो बार होगी सुविधाओं की जांच
आंगनवाड़ी केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विभाग भविष्य में साल में दो बार यह जांच अभियान चलाने की योजना बना रहा है। इसके लिए NURTURE या इसी तरह की डिजिटल प्रणाली में अलग ट्रैकिंग सुविधा विकसित की जाएगी। इससे केंद्रों की सुविधाओं और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी करना आसान होगा। पूरे अभियान के समन्वय के लिए उपायुक्त (आंगनवाड़ी) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- 20 नवंबर तक सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
राज्यभर से प्राप्त जांच रिपोर्टों का जिलावार विश्लेषण आयुक्त, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना की ओर से किया जाएगा। इसके बाद सभी आंकड़ों को एकत्रित कर उनका विश्लेषण किया जाएगा और 20 नवंबर 2026 तक समेकित रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट से महाराष्ट्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में उपलब्ध भौतिक सुविधाओं, उनकी मौजूदा स्थिति और डिजिटल रिकॉर्ड की सटीकता की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। इससे कमियों की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में भी मदद मिल सकती है।