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भोपाल । सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ कागजों में कितना और जमीन पर कितना पहुंच रहा है, अब इसकी निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मैदानी स्तर पर नया निगरानी तंत्र तैयार कर रहा है। इसके तहत 33 संविदा पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें 23 सहायक कार्यक्रम प्रबंधक और 10 लोक स्वास्थ्य प्रबंधक शामिल हैं। नई व्यवस्था में लोक स्वास्थ्य प्रबंधक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का मैदानी निरीक्षण करेंगे। वे यह पता लगाएंगे कि मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। दवाओं की उपलब्धता, कर्मचारियों की कमी और जरूरी सेवाओं की स्थिति जैसी समस्याओं की जानकारी भी अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।
सहायक कार्यक्रम प्रबंधक यह देखेंगे कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं निर्धारित समय पर और सही तरीके से संचालित हो रही हैं या नहीं। इसके लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से कामकाज की जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जहां समस्या सामने आएगी, उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। एनएचएम के अनुसार नई नियुक्तियों का उद्देश्य स्वास्थ्य योजनाओं में आने वाली कमियों को जल्दी पकडऩा है। किसी स्वास्थ्य केंद्र पर जरूरी सेवा उपलब्ध नहीं है, दवाओं की कमी है, कर्मचारी पर्याप्त नहीं हैं या किसी योजना का लाभ हितग्राहियों तक नहीं पहुंच रहा है तो इसकी सूचना समय पर अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।
मैदानी रिपोर्ट के आधार पर सुधार पर जोर
एनएचएम की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणय नागवंशी के अनुसार, इन कर्मचारियों की तैनाती से स्वास्थ्य योजनाओं की कमियां जल्द सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद संबंधित स्तर पर सुधार की कार्रवाई की जा सकेगी। नई व्यवस्था का फोकस केवल योजनाओं की प्रगति देखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह जानने पर भी रहेगा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का वास्तविक लाभ मरीजों और हितग्राहियों तक पहुंच रहा है या नहीं।
अस्पतालों का बनेगा ‘हेल्थ रिपोर्ट कार्ड’
लोक स्वास्थ्य प्रबंधक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में जाकर यह देखेंगे कि मरीजों को दवाएं मिल रही हैं या नहीं, डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध हैं या नहीं तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। किसी भी कमी या गड़बड़ी की जानकारी सीधे अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। सहायक कार्यक्रम प्रबंधकों की भूमिका योजनाओं की प्रगति पर नजर रखने, रिपोर्ट तैयार करने और प्रशासन को फीडबैक देने की होगी। इससे आयुष्मान भारत, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और अन्य योजनाओं की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन संभव होगा।