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मनासा.प्रसिद्ध कथावाचक एवं संत श्री कृष्णानंद महाराज ने मनासा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान अयोध्या पूरी धर्मशाला में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। पत्रकार वार्ता में उन्होंने धर्म, समाज, संस्कार, गौ सेवा, युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति, मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराते हुए उसे परमार्थ के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। संत श्री कृष्णानंद महाराज ने बताया कि अजमेर में उनकी संस्था की ओर से नेत्रहीन बच्चों सहित जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रम का संचालन किया जा रहा है। संस्था के माध्यम से सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में सेवा को विशेष महत्व दिया गया है और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सेवा, संस्कार एवं मानवता की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए।

कथा में अमीर-गरीब का भेद नहीं -

महाराज ने कहा कि संतों की वाणी पर सभी का समान अधिकार है। कथा के दौरान किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति या सामाजिक हैसियत नहीं देखी जाती। कथा में कोई अमीर या गरीब नहीं होता, वहां प्रत्येक व्यक्ति केवल श्रोता होता है। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा सभी के लिए है और इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सद्मार्ग अपनाने की प्रेरणा देना है।

सनातन धर्म में एकजुटता और समरसता पर जोर -

पत्रकारों ने वर्तमान समय में सनातन धर्म में दिखाई दे रहे बिखराव को लेकर भी सवाल किए। इस पर संत श्री कृष्णानंद महाराज ने धर्म के मूल भाव को समझने और आपसी समरसता बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं और पंथों की अपनी-अपनी मान्यताएं हो सकती हैं, लेकिन व्यापक रूप से धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना और मानव कल्याण की दिशा में प्रेरित करना है।

मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर भी सवाल -

पत्रकार वार्ता के दौरान मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर भी सवाल किया गया। इस विषय पर महाराज ने धार्मिक स्थलों की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु भगवान के दर्शन और आध्यात्मिक शांति की भावना लेकर आता है। धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

गौ माता और नशे के मुद्दे पर भी हुई चर्चा -

सड़कों पर घूमती गौ माता को लेकर पूछे गए सवाल पर भी संत ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने गौ सेवा को सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए समाज की जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाया। वहीं युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं को संस्कार, सत्संग और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी समाज और राष्ट्र की महत्वपूर्ण शक्ति है, इसलिए उसके चरित्र और संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

संविधान और श्रीमद्भगवद्गीता पर भी सवाल -

पत्रकारों ने संविधान एवं श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ में भी महाराज से सवाल किए। उन्होंने धर्मग्रंथों के संदेश और सामाजिक जीवन में उनके महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य को कर्तव्य, कर्म और जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण का संदेश देती है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक शिक्षाओं का उद्देश्य व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना और समाज में सद्भाव स्थापित करना होना चाहिए।

पत्रकारों ने शिव एवं वैष्णव पंथ की व्यवस्थाओं और दोनों परंपराओं के संबंध में भी सवाल किए। संत श्री कृष्णानंद महाराज ने विभिन्न धार्मिक परंपराओं और पंथों की मान्यताओं पर चर्चा करते हुए सनातन परंपरा की व्यापकता और विविधता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग उपासना पद्धतियां होने के बावजूद आध्यात्मिक उद्देश्य मानव कल्याण और ईश्वर की ओर अग्रसर होना है। महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारना जरूरी है। कथा मनुष्य को अपने कर्मों पर विचार करने, सेवा करने, संस्कारों को अपनाने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन तभी सार्थक होते हैं, जब उनका प्रभाव व्यक्ति के आचरण और समाज के व्यवहार में दिखाई दे। पत्रकार वार्ता के दौरान क्षेत्र के पत्रकारों ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं समसामयिक मुद्दों पर सवाल किए। संत श्री कृष्णानंद महाराज ने सभी सवालों का जवाब देते हुए धर्म और समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। इस दौरान भागवत कथा आयोजन से जुड़े श्रद्धालु एवं गणमान्यजन भी मौजूद रहे।