बिलासपुर । शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के निजी स्कूलों ने बड़ा फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आरटीई के तहत प्राप्त आवेदनों के सत्यापन कार्य में हिस्सा नहीं लेने का ऐलान किया है। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर में शिक्षा व्यवस्था पर असर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार 1 मार्च को हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि जब तक स्कूल शिक्षा विभाग प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाता, तब तक सभी निजी स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे। यह आंदोलन उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी 4988/2025 के आदेश के पालन तक जारी रहेगा।
निजी स्कूल नहीं करेंगे विभाग की मदद
असहयोग आंदोलन के तहत निजी स्कूलों ने स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी और नोडल प्राचार्यों के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही विभाग से जारी किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब भी नहीं दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि विभाग गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर संवेदनशील नहीं है और कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है। इसी के विरोध में यह कदम उठाया गया है।
प्रवेश प्रक्रिया व सत्यापन पर असर
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता व पदाधिकारियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव व प्रदेश के 20 जिलों में संगठन द्वारा संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी सौंपे जा चुके हैं। इस फैसले के बाद आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया और सत्यापन कार्य प्रभावित हो सकता है, जिससे अभिभावकों और विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई है।