नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में दूध उत्पादन जहां रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, वहीं मिलावट के बढ़ते मामलों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। हालिया जांच रिपोर्टों के अनुसार, देशभर में जांचे गए दूध के हर तीन नमूनों में से एक गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। विशेषज्ञ इसे फूड सेफ्टी के लिए गंभीर संकेत मान रहे हैं। वहीं सियासी गलियारे में चर्चा आम हो गई है कि ऐसा बताकर सरकार दूध आयात करने का रास्ता बनाने में लगी है, जिसका विरोध अनेक संगठन पहले से करते चले आ रहे हैं।   
भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में जांचे गए 38 प्रतिशत दूध के नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वित्त वर्ष 2015 से 2018 के बीच मिलावटी नमूनों में 16.64 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं वित्त वर्ष 2022 में जांचे गए 798 नमूनों में से लगभग आधे मिलावटी पाए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में उच्चतम स्तरों में से एक है।
हाल ही में ‘ट्रस्टिफाइड’ नामक एक स्वतंत्र टेस्टिंग प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ प्रतिष्ठित ब्रांड के पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया निर्धारित सीमा से 98 गुना तक अधिक पाया गया। इस खुलासे के बाद पैकेज्ड फूड और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। 
क्या आयात की जमीन तैयार हो रही?
मिलावट के बढ़ते मामलों के बीच कुछ विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या यह स्थिति भविष्य में दूध आयात के लिए माहौल तैयार करने की दिशा में तो नहीं जा रही। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन बढ़ती खपत और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं ने बहस को जन्म दिया है।
उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत का कुल दूध उत्पादन 24.8 करोड़ टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। पिछले 11 वर्षों में उत्पादन में 69.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 328 ग्राम है। भारत वैश्विक दूध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को और सख्त करना जरूरी है। नियमित सैंपलिंग, आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाकर ही मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।