भोपाल। मप्र सरकार की प्राथमिकता खेती-किसानी है। इसके लिए सरकार साल 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रहा है। सरकार को फोकस है की इस साल किसानों को अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। लेकिन विडंबना यह है की सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों का टोटा है। विभाग में कुल स्वीकृत 14 हजार 537 पदों में से 8 हजार 468 पद ही खाली पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मप्र में कृषि विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे होगा।
जानकारी के अनुसार, कृषि वर्ष के दौरान साल भर होने वाले आयोजनों में उद्यानिकी, मत्स्य पालन के अलावा ऊर्जा, उद्योग, जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, खाद्य नागरिक आपूर्ति और वन विभाग जैसे 16 सरकारी विभाग कृषि सेक्टर को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास करेंगे। अनाजों में रिसर्च, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, वित्तीय साधन देने और ब्रांडिंग के अलावा ट्रेनिंग और वैल्यू चैन बनीं के लिए 16 विभाग कृषि विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे। पर कृषि से सीधे जुड़े हुए विभागों में ही बड़ी संख्या में पद खाली हैं जिससे इस वार्षिक आयोजन के लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। एक्सपट्र्स के मुताबिक, फसल नुकसान सर्वे, सॉइल हेल्थ और नमो ड्रोन दीदी जैसी प्रमुख योजनाएं भी इससे प्रभावित रही हैं। इसके अलावा बड़े कृषि संस्थाओं जैसे कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में भी 1065 में से 557, बीज -फार्म विकास निगम में 14 में से 5, जैविक प्रमाणीकरण संस्था में 23 में से 8, कृषि विस्तार प्रशिक्षण में 49 में से 27 पद खाली हैं। मंडी बोर्ड में भी लगभग 40 प्रतिशत पद खाली हैं।
60 प्रतिशत पद खाली पड़े
जानकारी के अनुसार, पिछले कई सालों से कृषि विभाग में भर्ती नहीं हुई है। इस कारण कृषि विभाग में ही प्रदेश भर में लगभग 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक विभाग में कुल स्वीकृत 14 हजार 537 पदों में से 8 हजार 468 पद ही खाली पड़े हैं, जबकि कुल 6 हजार 126 पद ही भरे हुए हैं। वहीं, कृषि से सीधे जुड़े हुए मत्स्य पालन, खाद्य, उद्यानिकी और पशुपालन आदि विभागों में भी 20 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक स्वीकृत पद खाली हैं। कृषि से सीधे जुड़े हुए विभागों में भी अमले की कमी है। खाद्य संचालनालय में 109 पदों के विरुद्ध 48 अधिकारी-कर्मचारी हैं। जिलों कार्यालयों में 598 के विरुद्ध 245 का ही अमला है। खाद्य आयोग में 61 के विरुद्ध 48 पद खाली हैं। मत्स्य पालन में 1290 में से 722 पद खाली हैं। उद्यानिकी में 3079 में से 1459 पद खाली (47 प्रतिशत) हैं। वहीं, पशुपालन -डेयरी में 7992 पदों में से 1797 यानि 22 प्रतिशत पद खाली हैं। सहकारिता में भी लगभग 35 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। सहयोगी विभागों में भी यही स्थिति है। कृषि विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के 182 स्वीकृत में से 113 पद खाली हैं, जिनमें अपर, संयुक्त और उप संचालक जैसे पद हैं। वहीं वर्ग 1, वर्ग 2 और 3 में भी बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जैसे मैदानी पद भी लगभग 60 प्रतिशत खाली हैं।