भोपाल । रबी सीजन 2026-27 में गेहूं खरीदी के लिए राज्य सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है। इस बार प्रदेश में 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले साल से 5 लाख टन अधिक है। इसके लिए प्रदेश में 3623 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 240 केंद्र सीहोर व 197 केंद्र उज्जैन जिले में बनाए गए हैं। इस बार पहली बार खरीदी केंद्रों की ग्रेडिंग भी की जाएगी।
सरकार ने 16 प्रकार की सुविधाओं को आधार बनाया है। इनमें तौल कांटे, शेड, बाउंड्री वाल, पेयजल, टेंट, बैठने की व्यवस्था, तौल मशीन, इंटरनेट व कंप्यूटर और गेहूं साफ करने के लिए क्लीनिंग मशीन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें केंद्रों को सुविधाओं की जानकारी अपलोड करनी होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से होगी। राज्य सरकार इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेगी। इंदौर, उज्जैन, भोपाल व नर्मदापुरम संभाग में 15 मार्च से 5 मई तक व अन्य संभागों में 23 मार्च से 12 मई तक खरीदी होगी।
गेहूं खरीदी के नए नियम
गोदाम स्तरीय खरीदी केंद्र प्राथमिकता के आधार पर उन्हीं गोदामों में स्थापित किए जाएंगे, जिनमें पूर्व के सालों में कोई नान एफएक्यू (औसत गुणवत्ता से कम) रिजेक्टेड गेहूं भंडारित न हो। उपार्जन केंद्रों के स्थल इस प्रकार निर्धारित किए जाएंगे कि किसानों को गेहूं बेचने के लिए 25 किलोमीटर की परिधि में उपलब्ध हो। गोदाम एवं समिति स्तरीय केंद्र वहां बनेंगे, जिनमें 3000 से 5000 टन उपार्जन किया जा सके, इसमें 50 प्रतिशत की वृद्धि कमिश्नर फूड के द्वारा की जा सकेगी। जिन केंद्रों पर 500 टन से कम गेहूं का उपार्जन हुआ है, उनको नजदीक के केंद्रों में मिलाया जाएगा। गेहूं खरीदी में अमानक स्तर खरीदी कुल खरीदी की 01 प्रतिशत ही होगी। सीहोर व उज्जैन के बाद विदिशा में 190, रायसेन में 189, सागर में 176, नर्मदापुरम में 171 और देवास में 136 केंद्र बनाए जाएंगे।