भोपाल । भाजपा संगठन अब नई नियुक्तियों के मामलों में एक नया फार्मूला लाने जा रहा है। अभी तक नीचे से आने वाले नाम को लेकर संभागीय संगठन मंत्री और नगर अध्यक्ष की सहमति होती थी, लेकिन अब जिलों तथा संभागों में भेजे गए प्रभारियों की राय भी इन नियुक्तियों में अहम होगी। आने वाले समय में जो नियुक्तियां होना है, वह भी इसी फार्मूले से होगी।
भाजपा अपने संगठन के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन कर रही है। लंबे समय से चल रहे ढांचे को अब नए रूप में ढाला जा रहा है। इसको लेकर कुछ परिवर्तन लगातार किए जा रहे हैं। जिस तरह से भाजपा ने संभागीय संगठन प्रभारी के पदों को समाप्त किया था, उसी तरह प्रदेश संगठन महामंत्री के पद को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। भाजपा इस पद पर किसी की नियुक्ति करती है या नहीं, इसको लेकर संगठन की ओर से कोई खुलासा नहीं हुआ है, क्योंकि संगठन के फैसले सीधे दिल्ली से लिए जाते हैं, वहीं अब नगर स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में नया फार्मूला तय किया जा रहा है। विधायक, सांसद और अन्य नेता जो नाम देंगे, उनको लेकर पहले जिला और बाद में संभाग के प्रभारी उन नामों पर विचार करेंगे। बाद में वे प्रदेश को उनके नाम भेजेंगे। यही नहीं एल्डरमैन जैसी नियुक्ति में भी प्रभारी की राय मानी जाएगी। आगामी समय में निगम और मंडलों में भी अशासकीय नियुक्ति की जाना है, जिसको लेकर जद्दोजहद जारी है। नीचे से जो नाम प्रदेश स्तर पर तय किए जाएंगे, उसमें संभागीय संगठन प्रभारी की राय को तवज्जो दी जाएगी। कुल मिलाकर भाजपा ने संभागीय संगठन मंत्री और जिला प्रभारी के स्थान पर अब पार्टी के ही प्रभारियों को जवाबदारी देने का फैसला किया है। जिलों के प्रभारियों की नियुक्ति भी इसी तरह से की गई है कि उन्हें उनका गृहजिला नहीं सौंपा गया है।