भोपाल । आमतौर पर माना जाता है कि छोटे शहरों की आवोहवा ज्यादा शुद्ध होती है, लेकिन मध्य प्रदेश के एक दर्जन छोटे जिलों में हवा की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है। इसमें हरदा, अशोकनगर, बालाघाट, बैतूल जैसे जिले शामिल हैं। यह स्थिति पर्यावरण विभाग द्वारा तैयार किए गए औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक के पिछले 5 सालों के आंकड़ों से सामने आई है। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक इंदौर, जबलपुर को छोड़ दें तो राजधानी भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन सहित 35 जिलों में हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। हालांकि पर्यवरणविद ने इन आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं।
पर्यावरण विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के 2020-21 से लेकर जनवरी 2026 तक के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 19 जिलों में वायु प्रदूषण के आंकड़ों में गिरावट आई है। यानी इन जिलों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण बैतूल और नरसिंहपुर जिले में बढ़ा है। बैतूल जिले में 42.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में बैतूल में एवरेज एक्यूआई 82.9 था, जो 2022-23 में 109.33 और जनवरी 2026 में बढक़र 125 पहुंच गया। नरसिंहपुर जिले में वायु प्रदूषण का स्तर में 41.45 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2020-21 में नरसिंहपुर का एवरेज एक्यूआई 66.55 दर्ज किया गया था। साल 2022-23 में 79.29 रिकॉर्ड किया गया, जो जनवरी 2026 में बढक़र 108 पहुंच गया। पन्ना में औसत एक्यूआई में 17.54 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 में 70.46 था, जो 2023-24 में 72.85 हो गया और जनवरी 2026 में 88 रिकॉर्ड किया गया। रतलाम में औसत एक्यूआई में 15.86 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में 84.14 रिकॉर्ड किया गया था, जो 2022-23 में 100.5 पहुंच गया। साल 2024-25 में यह 113.52 पहुंच गया। इन जिलों के अलावा इंदौर, अशोकनगर, बालाघाट, देवास, डिंडौरी, गुना, हरदा, जबलपुर, मैहर, मंडला, मंदसौर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सतना, सिवनी, शहडोल, उमरिया जिलों में भी वायु प्रदूषण बढ़ा है।
भोपाल सहित 35 जिलों में घटा प्रदूषण
उधर आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश के 35 जिलों में वायु प्रदूषण के मामले में राहत मिली है। इन जिलों में प्रदूषण का स्तर घटा है। इसमें राजधानी भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन भी शामिल है। भोपाल में एवरेज एक्यूआई में 18.99 की गिरावट दर्ज किया गया है। साल 2020-21 में 123.29 एक्यूआई था, जो साल 2024-25 में 112.08 और जनवरी 2026 में 104.3 रिकॉड किया गया। उज्जैन में एवरेज एक्यूआई में 45.5 की कमी आई है। साल 2020-21 में एवरेज एक्यूआई 108.1 अंक था, जो जनवरी 2026 में घटकर 63.05 रिकॉर्ड किया गया। ग्वालियर में एवरेज एक्यूआई 52.24 की कमी आई है। साल 2020-21 में यह 179.24 रिकॉर्ड किया गया था, साल 2022-23 में यह 148.4 था और जनवरी 2026 में यह 127 रिकॉर्ड किया गया। इन जिलों के अलावा आगर में 5.74, अलीराजपुर में 0.66, बड़वानी में 2.68, भिंड में 60.15, बुरहानपुर में 10.83, छतरपुर में 35.13, छिंदवाड़ा में 8.81, दमोह में 47.92, दतिया में 9.35, धार में 13.19, ग्वालियर में 52.24, झाबुआ में 10.64, कटनी में 28.76, खंडवा में 25.35, खरगौन में 38.17, मऊगंज में 8.42, मुरैना में 72.99, नर्मदापुरम में 60.64, नीमच में 13.16, निवाड़ी में 31.15, रायसेन में 69.69, राजगढ़ में 24.56, रीवा में 33.4, सागर में 1.86, सीहोर में 25.9, शाजापुर में 2.53, श्योपुर में 52.53, शिवपुरी में 6.75, सीधी में 35.18, सिंगरौली में 26.3, टीकमगढ़ में 23.61, विदिशा में 11.66 औसत एक्यूआई रिकॉड किया गया। हालांकि एक जिले में एक्यूआई के आंकड़े एक जैसे बने हुए हैं।
पर्यावरणविद ने उठाए आंकड़ों पर सवाल
उधर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष चंद्र पांडे ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन जैसे बड़े शहरों की तरह छोटे शहरों में भी पॉल्युशन का स्तर ज्यादा होता है। यह अलग बात है कि बड़े शहरों और छोटे शहरों में पाल्युशन का कारण अलग-अलग होता है। छोटे शहरों में पीएम 10 की समस्या यानी धूल के कणों की समस्या होती है, जबकि बड़े शहरों में पीएम 2.5 यानी वाहनों के धुंआ, जलाने से उत्पन्न प्रदूषण ज्यादा होता है। कुल मिलाकर देखें तो प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां की हवा स्वस्थ है, यानी एक्यूआई 50 से कम हो। वे कहते हैं कि पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट हमेशा संदेह में रही है। भोपाल की आबादी के हिसाब से कम से कम 20 स्थानों पर एक्यूआई की मॉनिटरिंग होनी चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 4 स्थानों पर हो रही है। यही स्थिति प्रदेश भर की है। उन्होंने एक्यूआई मशीन से वायु की लाइव गुणवत्ता दिखाते हुए कहा कि अभी एक्यूआई 76 है, जबकि हम चौथी मंजिल पर बैठे हैं। इससे समझा जा सकता है कि रिपोर्ट कैसी होगी।