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नीमच।आज के समय में भगवान महावीर स्वामी के उपदेश, सिद्धांतों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उनके विचार और शिक्षाएं हमें अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य जैसे मूल्यों की ओर ले जाती हैं, जो वर्तमान समाज में कम होते जा रहे हैं 
भगवान महावीर का संदेश हमें सिखाता है कि हर जीव आत्मा है और समान है, और हमें सभी के प्रति करुणा और दया का भाव रखना चाहिए। उनके विचार हमें सामाजिक हिंसा, पर्यावरण विनाश, और नैतिक पतन जैसी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं  ।

आज के दौर में, जहां धार्मिक असहिष्णुता, जातीय हिंसा, और वैचारिक कट्टरता बढ़ रही है, भगवान महावीर के विचार हमें सहिष्णुता, संवाद, और समझदारी की ओर ले जा सकते हैं 
महावीर के उपदेशों का पालन करने से जैन समाज एकजुट हो सकता है और अहिंसा वादी बन सकता है। उनके प्रमुख उपदेशों में शामिल हैं  
- *अहिंसा*:
- *सत्य*: सदा सत्य बोलना, छल-कपट और झूठ से दूर रहना।
- *अचौर्य*: बिना अनुमति किसी की वस्तु न लेना, चाहे वह वस्तु, विचार या समय ही क्यों न हो।
- *ब्रह्मचर्य*: इच्छाओं पर संयम और विषय-वासना से दूर रहना।
- *अपरिग्रह*: अत्यधिक संग्रह, लालच और मोह से दूर रहना, जितना आवश्यक हो उतना ही उपभोग करना।

इन उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने से हम अहिंसा, संयम और संतोष का मार्ग दिखा सकते हैं। इसके अलावा, महावीर के उपदेश हमें सिखाते हैं कि केवल सादा जीवन और उच्च विचार ही मोक्ष की ओर ले जाते है

आज भौतिकता में ज्यादा फैशन दिखावा इतना बढ़ गया है ना कोई समाज का डर ना किसी का कोई रिश्ता भाई से भाई अलग हो गया अपने स्वयं के बच्चे अपनों से दूर हो गए हम किस संस्कार की बात करें, हमने अपने बच्चों को संस्कार ही नहीं दिए क्योंकि स्वयं व्यक्ति इतना व्यस्त हो जाता है कि उसे ना अपना और नाही परिवार का ख्याल रहता है जैन धर्म में स्वास्थ्य से लेकर संस्कारों से परिपूर्ण होना बताया है लेकिन हम समझ ही नहीं पा रहे हैं इंसान सिर्फ पैसे के पीछे भाग रहा है और रही सही बात मोबाइल ने पूरी कर दी है परिवार में 10 व्यक्ति है सभी के हाथ में मोबाइल मिलेगा किसी का किसी से कोई लेन देन नहीं सब अपनी अपनी मौज मस्ती में वास्तविकता में यह बड़ी दयनीय स्थिति पैदा हो गई है, जिसके कारण रिश्ते टूट रहे हैं जब समय निकल जाता है तब आंख खुलती है मुश्किल हो जाता है उस समय अब कैसे सुधार हो, अभी भी समय है
भगवान महावीर के उपदेशों को अपने जीवन में अपना कर हम न सिर्फ अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, समाज में एकता इंसान सत्य के मार्ग पर चलकर हम शांति ला सकते हैं 
पर्यावरण संरक्षण अपरिग्रह का पालन करके पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं 
नैतिकता जैसे उपदेश को अपनाकर हम अपने जीवन में नैतिकता और संयम ला सकते हैं  प्रभु महावीर के सिद्धांत जो आज पूरे विश्व के लिए जरूरी है, 2600 वर्ष पूर्व प्रभु महावीर ने जो बताया था वह आज हमारे सामने घटित हो रहा है युद्ध की स्थितियां बन गई है पूरे विश्व में शांति लाने के लिए अहिंसा बहुत जरूरी है तो आईए प्रभु महावीर जन्म कल्याणक पर हम प्रभु महावीर के सिद्धांत उपदेशों को अपना कर अपना ही नहीं समाज का ही नहीं अपितु पूरे राष्ट्र को एक नई दिशा दे सकते हैं अमन शांति ला सकते हैं हमें सिर्फ अहिंसा सत्य अचौर्य ब्रह्मचर्य अपरिग्रह अपना कर शांतिऔर सकुन की जिंदगी जी सकते हैं हमने हमारा सब कुछ बदल दिया रहना खाना पीना प्रकृति के साथ खिलवाड़ उसी का सारा नजरिया हमें देखने को मिल रहा है, यह मत भूलिए जैन धर्म सिद्धांत कर्म सिद्धांत है 
गीता में भी लिखा है जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान, मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों के भटकने बाद बहुत मुश्किल से मिला है, एक बार फिर यही कहना चाहूंगी हम सब महावीर की संतान हैं, नेकी पर चलें सत कार्य करें राग द्वेष, अहंकार को छोड़करअपने जीवन को सफल बनाएं आगे क्या होगा यह तोप्रभु ही जाने, ...........
( रानी राणा समाजसेविका )