नई दिल्ली । ट्रेनों के अंदर एसी कोच में अवैध अथवा वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के घुसने की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए रेलवे बोर्ड ने रियल-टाइम ऑक्यूपेंसी मॉनिटरिंग सिस्टम (आरओएमएस) लागू करने का फैसला किया है। ट्रेनों के एसी कोच में अवैध अथवा वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के घुसने की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए रेलवे बोर्ड ने रियल-टाइम ऑक्यूपेंसी मॉनिटरिंग सिस्टम (आरओएमएस) लागू करने का फैसला किया है। यह एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हैं, जोकि एक प्रकार से ‘डिजिटल टीटीई’ की भूमिका में होंगे। कैमरे कोच के गेट, गलियारे व टॉयलेट के पास की निगरानी करेंगे। ये अवैध यात्रियों की मौजूदगी की जानकारी टीटीई के हैड हेल्ड टर्मिनल व जीआरपी कंट्रोल रूम को सीधे भेजेंगे। रेलवे बोर्ड ने इस तकनीक के प्रोटोटाइप को हरी झंडी दे दी है। शुरुआत में वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस सिस्टम में साधारण कैमरा नहीं, बल्कि एक इंटेलिजेंट विजन नेटवर्क है, जो तीन स्तरों पर काम करेगा। पहला प्रवेश द्वार पर यात्री का फेस स्कैन होगा। कोच के दरवाजों पर लगे हाई-डेफीनिशन 4के कैमरे हर प्रवेश करने वाले व्यक्ति का चेहरा स्कैन करेंगे। यह डेटा तुरंत रेलवे के सेंट्रलाइज्ड पैसेंजर डाटाबेस (पीआरएस) से मिलान किया जाएगा। दूसरा चार्ट इंटीग्रेशन तकनीक में एआई सिस्टम उस विशेष कोच के डिजिटल चार्ट से जुड़ा होगा। कैमरे द्वारा स्कैन किया गया चेहरा उस कोच के किसी बर्थ के लिए आरक्षित यात्री से मेल नहीं खाता है, तो सिस्टम उसे संदिग्ध की श्रेणी में डाल देगा। जबकि तीसरा हेड काउंट और स्टे-ड्यूरेशन तकनीक में कोई यात्री अपनी सीट पर न होकर गलियारे या शौचालय के पास लंबे समय तक खड़ा रहता है (ऐसा वेटिंग टिकट वाले करते हैं) तो एआई उसकी रुकने की अवधि को ट्रैक करेगा। इस तकनीक की सटीकता दर कम रोशनी में भी 99.8 फीसदी है। अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट में जीरो मानवीय हस्तक्षेत्र नीति रखी है। सिस्टम अवैध यात्री की पहचान करते ही कोच में ड्यूटी पर मौजूद टीटीई के हैंडहेल्ड टर्मिनल पर एक बीप के साथ यात्री की फोटो और कोच में उसकी सटीक लोकेशन फ्लैश कर देगा।