नीमच। ‘है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी बन गए, है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय, जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गए।‘ इन्हीं भावपूर्ण पंक्तियों के साथ ग्रुप केन्द्र, सी.आर.पी.एफ. नीमच द्वारा पुलवामा के अमर वीर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 का वह काला दिवस आज भी राष्ट्र की स्मृतियों में टीस बनकर जीवित है, जब आतंकवादी संगठन “जैश-ए-मोहम्मद” के कायराना आत्मघाती हमले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवन्तिपोरा (पुलवामा) के निकट सीआरपीएफ की कॉनवाई पर हमला किया गया था। इस अमानवीय कृत्य में सीआरपीएफ के 40 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति देकर अद्वितीय शौर्य और बलिदान की अमिट गाथा लिखी। उन अमर शूरवीरों की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 फरवरी को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कभी न भूले। देश की आन-बान-शान की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले ये वीर सपूत इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में सदा-सर्वदा अमर रहेंगे। उनके त्याग और समर्पण के प्रति सम्पूर्ण राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा। पुलवामा आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु शनिवार को ग्रुप केंद्र, नीमच में विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। हाथों में जलती मोमबत्तियाँ, आँखों में गर्व और हृदय में शहीदों के प्रति अथाह सम्मान लिए अधिकारीगण, जवान एवं उनके परिजन भावभीने वातावरण में मौन श्रद्धांजलि देते हुए आगे बढ़े। इस कैंडल मार्च में श्री प्रमोद कुमार साहू, कमांडेंट, ग्रुप केंद्र नीमच सहित ग्रुप केंद्र एवं कैम्पस स्थित अन्य सभी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारीगण, अधीनस्थ अधिकारीगण, जवानों तथा उनके परिजनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। शौर्य स्थल स्थित शहीद स्मारक पर पहुँचकर सभी ने अमर शहीदों की पुण्य स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे परिसर में गूंजती देशभक्ति की भावना और मौन की गंभीरता ने वातावरण को अत्यंत भावुक बना दिया। तत्पश्चात दो मिनट का मौन रखकर परब्रह्म परमेश्वर से दिवंगत पुण्यात्माओं की शांति तथा शोकसंतप्त परिवारों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की गई। इस अवसर पर अधिकारियों, जवानों के परिजनों एवं बच्चों ने भी पूर्ण श्रद्धा और भाव-विभोर हृदय से भाग लेकर यह संदेश दिया कि शहीदों का बलिदान केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा में अंकित अमर प्रेरणा है।