कुकड़ेशवर (प्रकाश एस जैन )। नीमच जिले से 40 किलोमीटर दूर कुकड़ेश्वर नगर के आसपास कई पुरातत्व संपदा विद्यमान है । इसी में से एक नगर के उत्तर में ताज के रूप में स्थापित श्री सहस्त्र मुखैश्वर महादेव मंदिर हैं जो गुप्तकालीन याने लगभग 1500 वर्ष पुराना है ।इसकी स्थापना किस राजा ने की यह तो उल्लेख नहीं मिलता लेकिन 1925 से यहां बिल पत्र चढ़ाने व नंदी पूजा तथा अभिषेक का इतिहास ज्ञात है। बाद में इंदौर के महाराजा तुकोजीराव द्वितीय ने पुराने मंदिर के खंडित होने पर उन्होनें इसका पुनः निर्माण कराया था ।मंदिर के बाहर की आकृति महलनुमा बनाई गई है। मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में है लिंग की पुरातनता के बारे में डॉक्टर वाकणकर का कहना है कि यह सहस्त्र लिंग गुप्त कालिन यानी 1500 वर्ष पुराना है । बुजुर्गों का कहना है कि यह शिवलिंग अपने शिव परिवार सहित आमद पठार से बैलगाड़ी में रखकर अन्यत्र कहीं ओर ले जाए जा रहे थे किंतु यहां अभी जहां मंदिर स्थापित है, वहां पर बेल गाड़ी का पहिया टूट गया था इसीलिए इस शिवलिंग की स्थापना यही कर दी गई तो माता पार्वती की प्रतिमा थोड़े दूर मनासा रोड पर नई आबादी में स्थापित की गई तो साथ ही गणेश जी की प्रतिमा हनुमंतिया रोड पर स्थापित कर दी गई। इस शिवलिंग पर हजारों मुख स्थापित है इसलिए इसे सहस्त्र मुखेश्वर महादेव कहा जाता है ।यहां पर सावन मास में सवा लाख बिल्व पत्र चढ़ाए जाने तथा नंदीदीप पूजा की परंपरा का निर्वाह आज भी किया जा रहा है। यह शिवलिंग चमत्कारिक होकर तत्वफलम शिवदर्शनम का लाभ देने वाला है ।यहां पर पूरे सावन मास में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है साथ ही जनसहयोग से सावन के अंतिम सोमवार को शाही सवारी (बरात) निकाले जाने की परंपरा है तो वही मार्च माह में आने वाली महाशिवरात्रि पर्व पर नगर पंचायत के समय से ही 8 दिवसीय धार्मिक एवं व्यापारिक मेले का आयोजन किया जाता आ रहा है ।जो नगर पंचायत के कार्यकाल में 10 दिन का कर दिया गया है। जहां एक और सावन मास में प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से ही अभिषेक का दौर शुरू हो जाता है तो वही महाशिवरात्रि पर्व पर सारस्वत ब्राह्मण समाज द्वारा परंपरा से किए जा रहे अभिषेक में समाज द्वारा सुबह अभिषेक ध्वजारोहण प्रसाद वितरण के साथ रात्रि के 4 पहर में चार अभिषेक किए जाने की परंपरा आज भी जारी है चमत्कारी तालाब श्री सहस्त्र मकेश्वर शिवलिंग तत्वफलम शिवदर्शनम का लाभ देने वाला है तो वही मंदिर के आगे स्थित तालाब काजल और मिट्टी सफेद रोग (चर्म रोग) को ठीक कर देने वाला है यही नहीं इस मंदिर के आगे विशालकाय तालाब मौजूद है जो सावन मास में लबालब भर जाने पर अपनी अलग ही मनोरम छवि प्रस्तुत करता है जो दर्शनार्थियों को अपनी और लुभाता है।