नीमच। श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच में “संगीत, संस्कृति एवं शैक्षणिक नवाचार” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर संगीत की सुरमयी वर्षा ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। तृतीय एवं चतुर्थ सत्र में इंदौर (मध्यप्रदेश) से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीत शास्त्री एवं प्रस्तोता श्री अभय मानके ने महाराष्ट्र के प्रसिद्ध एवं प्रसादिक “गीत रामायण” की हिंदी में संगीतमय प्रस्तुति देकर उपस्थित संगीत प्रेमियों का हृदय जीत लिया।श्री मानके अब तक मॉरीशस रामायण केंद्र, हिंदू मंदिर अमेरिका, लंदन सहित बनारस, कोलकाता, मुंबई, पुणे आदि शहरों में “गीत रामायण” की 4000 से अधिक सफल प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति में रामायण के प्रसंगों की गहराई, संगीत की मधुरता और शब्दों की पवित्रता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। पूरे सभागार में भक्तिभाव और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण निर्मित हो गया।कार्यक्रम के दौरान अभय मानके ने प्रतिभागियों को अत्यंत रोचक शैली में संगीत का प्रशिक्षण देते हुए कहा कि “संगीत गाने से अधिक सुनने से आता है।” उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि शास्त्रीय संगीत राग, ताल और कठोर नियमों पर आधारित साधना है, जबकि सुगम संगीत सरल, भावप्रधान और लोकप्रिय शैली है, जिसे सहजता से समझा और गाया जा सकता है। उनके गायन में विभिन्न सुरों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीमती अमृता मानके ने सुरों में सुंदर संगति प्रदान की, जबकि तबले पर श्री प्रीत निर्वाण और हारमोनियम पर श्री एजाज अहमद ने उत्कृष्ट संगत कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की।द्वितीय दिवस का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा कालानी ने अतिथि कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि आज का दिन संगीत साधना के रूप में स्वरों की अमृत वर्षा का दिन है। संगीत भारतीय संस्कृति में मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। सह-संयोजिका डॉ. अमृता सोनी ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन स्वर एवं लय की बारीकियों की समझ विकसित करने और सृजनात्मक प्रतिभा को निखारने का प्रयास है।मीडिया प्रभारी डॉ. पी.सी. रांका ने बताया कि प्रातः 11 बजे से सायं 5:30 बजे तक चले प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारण के माध्यम से भी देशभर से बड़ी संख्या में दर्शक जुड़े। रतलाम, जावरा, इंदौर, रामपुरा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, विद्यार्थी और संगीत प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यशाला को सफलता के शिखर तक पहुंचा दिया।