नीमच।भारतीय संस्कृति में संगीत जीवन का एक अभिन्न अंग है। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक संगीत आच्छादित रहता है। संगीत मानसिक एवं शारिरिक स्वास्थ्य के लिये एक शक्तिशाली चिकित्सा थेरेपी भी है“। उक्त उद्गार नीमच क्षेत्र के प्रसिद्ध संगीत प्रेमी एवं समाजसेवी श्री जम्बुकुमार जी जैन ने श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच में " संगीत, संस्कृति एवं नवाचार “ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होनें संगीत का महत्व बताते हुए कहा कि संगीत मन को सुकून, तनाव से राहत एवं सामाजिक जुड़ाव का एक शक्तिशाली माध्यम है । दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिवस पर उद्घाटन सत्र के पश्चात् 02 तकनीकी सत्रों में मोहनलाल सुखाड़ियॉ विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ0 पामिल मोदी ने जाजू कन्या महाविद्यालय को संगीत विषय पर कार्यशाला आयोजित करने की बधाई देते हुए “ होंठो से छूलो तुम, मेरा गीत अमर कर दो” मधुर गीत प्रस्तुत करते हुए संगीत के विभिन्न स्वरों एवं रागों के बारें में प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया। डॉ0 पामिल मोदी ने संगीत प्रेमी प्रतिभागियों से सीधा संवाद करने के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियों के साथ संगीत कला का प्रभावी प्रशिक्षण दिया। डॉ0 पामिल मोदी के साथ उदयपुर से पधारें संगीतकार हारमोनियम पर हरिओम तिवारी एवं तबलें पर रितिक कुमावत ने शानदार प्रस्तुतियॉ दी। कार्यशाला के पूर्व महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ0 प्रतिभा कालानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगीत विषय पर कार्यशाला का महत्व बताते हुए कहा कि संगीत मनोरंजन, भावनात्मक अभिव्यक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य का एक शक्तिशाली माध्यम् है, जो सामाजिक जुड़ाव के साथ आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। नीमच क्षेत्र की प्रसिद्ध संगीत प्रेमी श्रीमती जयश्री वर्मा भी विशिष्ट अतिथि के बाद रूप में मंचासीन थी। कार्यशाला का प्रारंभ मॉ सरस्वती की प्रतिमा सम़क्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। संगीत विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना के पश्चात् स्वागत गीत की प्रभावी प्रस्तुति भी दी। कार्यक्रम का संचालन संगीत विभागाध्यक्ष प्रो0 संजय बिजौलियॉ ने किया तथा संगीत प्राध्यापिका डॉ0 अमृता सोनी ने आभार प्रर्दशन किया। मीडियॉ प्रभारी डॉ0 पी.सी. रांका ने बताया कि 02 दिवसीय कार्यशाला के लिये देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराये है तथा यू.-ट्यूब लाईव प्रसारण के माध्यम् से भी देश भर से प्रतिभागियों ने संगीत कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला के दूसरे दिवस 11 फरवरी को इंदौर (मध्यप्रदेश) के संगीत शास्त्र प्रस्तोता अभय मानके, विशिष्ट वक्ता के रूप में तृतीय एवं चतुर्थ सत्रों में संगीत कला की बारीकियों एवं नवाचार के संबंध में प्रशिक्षण देंगे।