नीमच ।*सम्पूर्ण उज्जैन सम्भाग में पहली बार श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच (म.प्र.) में उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल (म. प्र.) के तत्वाधान में "संगीत , संस्कृति एवं शैक्षणिक नवाचार" विषय पर दिनांक 10 एवं 11 फरवरी 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।* *इस कार्यशाला के प्रधान संरक्षक- डॉ. एच. के. अनिजवाल, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, उज्जैन संभाग तथा संरक्षक महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. प्रतिभा कालानी हैl* *प्रथम दिवस पर दो सत्रों में कार्यशाला की प्रथम मुख्य अतिथि वक्ता - डॉ. पामिल मोदी, विभागाध्यक्ष , संगीत विभाग, मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज. ) अपने ज्ञान एवं कला से प्रतिभागियों को लाभान्वित करेंगी।* *द्वितीय दिवस पर मुख्य अतिथि वक्ता श्री अभय मानके जी संगीत शास्त्र प्रस्तोता, इंदौर (म.प्र.) तृतीय एवं चतुर्थ सत्रों में प्रतिभागियों के समक्ष संगीत कला की बारिकियों के सम्बन्ध में उत्कृष्ट ज्ञान का प्रदर्शन करके संगीत कला के नवाचार की शिक्षा प्रदान करेंगे।* *राष्ट्रीय संगीत कार्यशाला के संयोजक प्रो. संजय कुमार बिजोलिया (संगीत विभागाध्यक्ष) और 👩🏫सहसंयोजक:- डॉ. अमृता सोनी ने संगीत , भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय संस्कृति में रूचि रखने वाले सभी शैक्षणिक वर्ग, विद्यार्थियों एवं संगीत प्रेमियों को इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने हेतु आधिकाधिक रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अपील की है।* *दो दिवसीय राष्ट्रीय संगीत कार्यशाला का आयोजन स्थल:-श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच (मध्यप्रदेश) रहेगाI
कार्यशाला में सभी शासकीय, अशासकीय, महाविद्यालय, विद्यालयों के विद्यार्थी, प्राध्यापकगण, शिक्षकगण, संगीत संस्थाओं, संगीतप्रेमी लोगो को भी आमंत्रित किया गया है ताकि संगीत की बारीकियों और तकनीकी ज्ञान को प्राप्त कर सके! *इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संगीत के प्रति रुचि और जागरूकता निर्माण के साथ ही संगीत एवं संस्कृति से संबंधित शैक्षणिक एवं शोधात्मक विषयों का राष्ट्रीय स्तर के विद्वानों से संवाद स्थापित करना भी है।* *# महाविद्यालय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर संगीत (गायन) विषय के चयन हेतु मार्गदर्शन प्रदान करना।* *# करियर के विकल्प में रूप में संगीत प्रति जागरूकता प्रदान करना हैl प्रतिभागियों में संगीत के मूल सिद्धांत और ताल की समझ को विकसित करना। गायन एवं वादन के कौशल को निखारना और समूह गतिविधियों द्वारा टीम वर्क की भावना को विकसित करना। संगीत की श्रवण क्षमता और संगीत समन्वय को बेहतर बनाना। विभिन्न संगीत शैलियों और विधाओं के प्रति रुचि एवं समझ विकसित करना हैl इस राष्ट्रीय कार्यशाला में पंजीयन कराने वाले सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जायेगा।